तिथि, समय एवं स्थान विवरण
करण विवरण (Karana Details)
तिथि का आधा भाग (Half of Tithi)-
| अधिष्ठाता देवता (Deity) | - |
|---|---|
| स्वामी ग्रह (Ruling Planet) | - |
| प्रकृति / स्वभाव (Nature) | - |
| कुल अवधि (Total Duration) | - |
अनुकूल एवं शुभ कार्य (Recommended Actions)
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वर्जित कार्य (Prohibited Actions)
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नित्य योग विवरण (Nitya Yoga Details)
सूर्य + चंद्र का भोगांश योग (Sun + Moon Sum)-
| अधिष्ठाता देवता (Deity) | - |
|---|---|
| स्वामी ग्रह (Ruling Planet) | - |
| वर्ज्य घटी (Sensitive Period) | - |
| शाब्दिक अर्थ (Meaning) | - |
जन्म योग फल व व्यक्तित्व (Birth Traits)
-
मुहूर्त मार्गदर्शन (Muhurta Guidance)
-
आज दिनभर के करण और योग (24-Hour Transitions)
-चयनित दिनांक के दौरान होने वाले सभी करण एवं नित्य योग के आरंभ व समाप्ति का समय:
करण अनुक्रम (Karanas of the Day)
योग अनुक्रम (Yogas of the Day)
🚨 विशेष भद्रा विचार (Vishti Karana / Bhadra Analysis)
भद्रा प्रभावी (Active)भद्रा का वास: -
-
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📜 वैदिक ज्योतिष के 11 करण (11 Karanas Encyclopedia)
7 चर करण (Movable) + 4 स्थिर करण (Fixed)🌟 27 नित्य योग निर्देशिका (27 Nitya Yogas Directory)
सूर्य एवं चंद्र की युति से निर्मित 27 योगों का संपूर्ण फल🛡️ भद्रा (विष्टि करण) संपूर्ण विचार एवं नियम (Bhadra Comprehensive Guide)
भद्रा क्या है? (What is Bhadra?)
पंचांग के 11 करणों में 7वां करण 'विष्टि' है, जिसे लोक भाषा और ज्योतिष में 'भद्रा' कहा जाता है। पौराणिक मान्यतानुसार भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री तथा शनिदेव की सगी बहन हैं।
भद्रा का स्वभाव अत्यंत उग्र एवं चंचल माना गया है। इसलिए शुभ एवं मांगलिक कार्यों में भद्रा काल को त्याज्य माना जाता है।
भद्रा में क्या करें और क्या न करें?
- वर्जित कार्य: विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नया व्यापार, रक्षाबंधन, यात्रा, भूमि पूजन, कोई भी नया शुभ अनुबंध।
- प्रशस्त कार्य: शत्रु दमन, मुकदमा दायर करना, तंत्र-मंत्र साधना, विष प्रयोग निवारण, अग्नि कार्य, भैंस/अश्व क्रय, शस्त्र निर्माण।
चंद्र राशि अनुसार भद्रा निवास चक्र (Bhadra Residence by Moon Sign)
| चंद्र राशि (Moon Sign) | भद्रा का निवास (Residence) | पृथ्वी पर प्रभाव (Result on Earth) | मुहूर्त पात्रता (Auspiciousness) |
|---|---|---|---|
| मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक (Aries, Taurus, Gemini, Scorpio) | स्वर्ग लोक (Heaven) | धन-धान्य, विजय एवं समृद्धि प्रदायक | शुभ / ग्राह्य (दोषरहित) |
| कन्या, तुला, धनु, मकर (Virgo, Libra, Sagittarius, Capricorn) | पाताल लोक (Netherworld) | कार्य सिद्धि, शांति एवं व्यापारिक लाभ | शुभ / ग्राह्य (दोषरहित) |
| कर्क, सिंह, कुंभ, मीन (Cancer, Leo, Aquarius, Pisces) | मृत्युलोक / पृथ्वी (Earth) | सर्वनाश, विघ्न, हानि एवं क्लेशकारी | अत्यंत अशुभ / सर्वथा वर्जित |
भद्रा के विशेष परिहार (Bhadra Exceptions & Puchha Timing)
शास्त्रों के अनुसार यदि अति अनिवार्य कार्य हो तो 'भद्रा पुच्छ' (Bhadra Tail) के समय में कार्य संपन्न किया जा सकता है क्योंकि पुच्छ काल में भद्रा का दोष न्यूनतम अथवा शून्य होता है, जबकि 'भद्रा मुख' (Bhadra Face) में कार्य करना विनाशकारी माना गया है।